What is Marketing in Hindi

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दोस्तों आज की तारीख में कोई भी चीज बिना Marketing के पॉसिबल ही नहीं है और मार्केटिंग हर एक चीज हर एक बिजनेस एक जगह में बहुत ज्यादा जरूरी मान लीजिए आपके पास कोई वस्तु या कोई प्रोडक्ट है जो कि काफी सारे लोगों की प्रॉब्लम को सॉल्व कर रहा है तो ऐसे में आपको इस प्रोडक्ट को लोगों को दिखाने के लिए लोगों तक पहुंचाने के लिए मार्केटिंग का इस्तेमाल करना होगा इसका इस्तेमाल करने के लिए पहले आपको मार्केटिंग करनी आनी चाहिए.

कई बार दोस्तों ऐसा होता है कि मार्केटिंग ना आने की वजह से हमारा व्हाट्सएप खाता प्रोडक्ट भी धूल में मिल जाता है इसका बहुत ही अच्छा एग्जाम पर है टाटा की गाड़ी नैनो मार्केट में आई तो नैनो मार्केट में बिल्कुल नई गाड़ी की जिसने कई सारे लोगों की बहुत सी प्रॉब्लम सॉल्व किया प्रॉब्लम को सॉल्व करते करते वह लोग यह भूल गए थे कि इनके लिए बहुत अच्छी मार्केटिंग स्ट्रेटजी चाहिए होती है क्योंकि नैनो मार्केट में नई गाड़ी और बहुत ही सस्ती गाड़ी की जोकि अफॉर्डेबल रेट में यानी बजट में लोगों को गाड़ी का अनुभव करवा रही थी इस वजह से जो इसकी मार्केटिंग है वह फ्री होती जा रही थी पर दोस्त तो धीरे-धीरे वह गाड़ी की मार्केटिंग की वजह से मार्केट में धूल में मिलती चली गई यानी लोगों को यह लगने लगा कि यह गाड़ी cheap है और cheap किसी भी इंसान के लिए एक तरह का बेज्जती और गलती होती है और गाली होती है और इसका परिणाम यह हुआ कि लोगों को नैनो लेने के बजाय एक बाइक लेने में ज्यादा सुख महसूस हुआ तो दोस्तों आप जान गए होंगे कि मार्केटिंग कितनी जरूरी है मार्केटिंग के बिना आपका कोई अच्छे से अच्छा प्रोडक्ट भी बेकार हो जाता है मुख्यत: मार्केटिंग वह तरीका है जिसके द्वारा लोग अपनी जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति के लिए आपके व्यापार से परिचित होते हैं हमारे आसपास कई ऐसे लोगों के पास एक बहुत अच्छा बिजनेस प्लेन होता है, परंतु उसे सही मार्केटिंग ना मिल पाने की वजह से वह लोगों तक नहीं पहुंच पाता और असफल हो जाता है.

आपको अपने व्यापार को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आप अपने दायरे को बाहर आकर लोगों तक अपनी सोच को पहुंचाएं और अपने लिए एक ग्राहकों का आधार तैयार करें. दोस्त मार्केटिंग का इस्तेमाल हम एडवरटाइजिंग, सेलिंग, और प्रमोशन मार्केटिंग का ही एक भाग है, परंतु मार्केटिंग केवल इन तक सीमित नहीं इससे और भी बहुत कुछ जुड़ा हुआ है.

मार्केटिंग के 6 पी (6 P’s of Marketing):

दोस्त जब भी आप कभी भी किसी भी प्रोडक्ट को बनाते हैं जब आप अपने प्रोडक्ट या सेवा को लांच करते हैं तो आपको मुख्यतः 6 बातों का ध्यान रखना पड़ता है, इन्हें मार्केटिंग के 6 पी के नाम से जाना जाता है. यह 6 पी निम्न है:-

  • प्रोडक्ट
  • प्राइस
  • प्लेस
  • प्रमोशन
  • पीपल
  • प्रोसेस

1. प्रोडक्ट:- किसी भी प्रोडक्ट से हमारा मतलब होता है कि जब भी उस वस्तु या सेवा से, जो आप अपने ग्राहकों को प्रदान करते हैं. जब आप अपने व्यापार के रूप में सेवा का चयन करते हैं तो आपको इसकी पैकेजिंग और लेबलिंग जैसे फीचर की चिंता करने की आवश्यकता होती नहीं है, परंतु इसके लिए आपको ब्रांडिंग और क्वालिटी का खासतौर पर ध्यान रखना होता है. वही जब भी आपको कोई प्रोडक्ट अपने कस्टमर तक पहुंचाना है तो उसके लिए आपको इसकी पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और क्वालिटी सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होगा. इसके अलावा को अपने प्रोडक्ट के सभी का ध्यान रखना होता है.

2. प्राइस :- प्राइस किसी भी वस्तु यह सेवा की वह कीमत होती है, जो कि ग्राहक वस्तु या सेवा के बदले में प्रदान करता है. अपनी किसी भी वस्तु या सेवा का प्राइस टच करते वक्त आपको मार्केट में उपलब्ध अन्य प्रतिस्पर्धा को ध्यान रखना पड़ता है. परंतु यदि आपका प्रोडक्ट बेस्ट और यूनिक है तो आप अपने मन की के मुताबिक प्रॉफिट कमा सकते हैं. competitive प्राइस क्या है पंडा कुछ लग्जरी प्रोडक्ट के लिए भी फेल हो जाता है. जैसे ऑडी और मर्सिडीज जैसे कारों की कीमत मार्केट में उपलब्ध अन्य कारों की तुलना में ज्यादा है और यह साड़ियां मतलब इस तरह का जो प्रोडक्ट है वह मार्केट में दिखता भी है. परंतु इन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इनका टारगेट मार्केट ही अलग है. परंतु अगर आप कोई नया प्रोडक्ट लांच कर रहे हैं, तो आपको मार्केट को ध्यान में रखना होगा.

3. प्लेस :- प्लेस वह जगह है, जहाँ से आपके ग्राहक आपका प्रोडक्ट या सर्विस खरीदते है. इसमें मार्केटिंग के सभी चैनल भी समिल्लित है . मार्केटिंग निम्न चैनल शामिल है :-

ग्राहक को डायरेक्ट रिटेलिंग : इस तरीके से आप साफ तौर पर किसी भी स्टोर या अन्य आउटलेट खोलकर अपने सेवा या प्रोडक्ट ग्राहकों को ऑफर कर सकते है. इस स्तिथि में प्रोडक्ट या सर्विस की प्राइस अपेक्षाकृत कम होती है, क्युकी इस स्तिथि में मध्य चैनल

मैं लगने वाले खर्च की बचत होती है और यह इसका मुनाफा किसी बिजनेसमैन को खुद ही मिलता है और इससे उसको सफलता मिलती है और इस सफलता से वह आगे बढ़ता है और इस तरह से मैं बढ़ता चला जाता है इसी दुनिया में दोस्तों बहुत सारी चीजों को अपनाने में और उसको साथ में रख मेहनत करनी पड़ती है वस्तु को होलसेलर वह बीच की कड़ी है, जिसके माध्यम से वस्तु एक व्यक्ति से होगा अन्य तक पहुंचती है. जब आप अपने व्यापार का दायरा बढ़ा लेते हैं, तो आपको होलसेलर की आवश्यकता पड़ती है.

फ्रेंचाइजी :- फ्रेंचाइजी आज के समय में बहुत जरूरी है, पहले केवल वस्तुओं के लिए होल्सेलर के द्वारा व्यापार का दायरा बढ़ाया जा सकता था. परंतु अब विशेष ट्रेनिंग और ट्रिक्स के जरिए सेवाओं का भी दायरा बढ़ाया जाना संभव हुआ है. जावेद हबीब, मैकडॉनल्स फ्रेंचाइजी, पिज़्ज़ा हटा दी कई सफल फ्रेंचाइजी के उदाहरण हमारे सामने मौजूद है.

रिटेल ऑनलाइन :- आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग बहुत चलन में है, इसके द्वारा आप अपनी वस्तु या सेवा डायरेक्ट ऑनलाइन तरीके से अपने कस्टमर को प्रदान कर सकते हैं. आज की तारीख में लोगों के लिए काफी ज्यादा वैरायटी की प्रोडक्ट मार्केट में मिल जाते हैं मगर आपको ऐसे प्रोडक्ट पर ध्यान देना है जिनकी मार्केटिंग आप आसानी से कर सके या जिनकी मैन्युफैक्चरिंग आप बहुत बढ़िया तरीके से कर सके क्योंकि हमको एक सफलता मिलती है.

इन सबके अलावा आप अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर, कंसलटेंट गैस एजेंसी का भी उपयोग कर सकते हैं.

4. प्रमोशन :- प्रमोशन मार्केटिंग का सबसे अहम होता है, इसी के सहायता से आप अपना प्रोडक्ट या सर्विस कस्टमर तक पहुंचाते हैं. आजकल हमारे पास प्रमोशन के लिए कई तरीके जैसे वेबसाइट, सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, इ- न्यूज़ लेटर, नेटवर्क, टेंप्लेट, टीवी, वीडियो, एडवरटाइजिंग, वर्ल्ड ऑफ माउथ एडवरटाइजिंग, लॉयल्टी एंड रीवार्ड प्रोग्राम, कोल्ड कॉलिंग आदि . इन तरीकों का उपयोग कर आप अपनी बिजनेस बेहतर पहचान दिलवा सकते हैं.

5. पीपल :- यहां पेपर से हमारा तात्पर्य आपके ग्राहकों से ना हो कर, आप के सप्लाई, डिस्ट्रीब्यूटर, फूल सीनस, स्टॉकहोल्डर और आपके एंपलॉयर्स से हैं. यह सभी लोग आपके व्यापार में आपकी टीम का एक हिस्सा होते हैं और आपके व्यापार की सफलता में सभी का बराबर कितना होता है.

6. प्रोसेस :- आपके बिजनेस की सफलता के लिए कस्टमर सर्विस और मार्केटिंग प्रोसेस बहुत ही अहम हिस्सा है. दोस्तों मार्केटिंग के काम में समय पर नए टॉप ऑर्डर करना. इस समय पर ग्राहक तक पहुंचाना, आपकी ग्राहक से फीडबैक को इकट्ठा करना और सेल्स और फाइनलाइजेशन रिपोर्ट को रेगुलर एनालाइज करना आदि शामिल है. अगर इनमें से अगर कुछ भी गड़बड़ हो जाती है तो आपका मार्केट और बिजनेस दोनों प्रभावित होते हैं.

जब भी आप कोई बिजनेस शुरू करते हैं तो उनके लिए मार्केटिंग के तरीके आपके लिए रामबाण इलाज है जिनको आप अपना कर अपने बिजनेस को और आगे Growth कर सकते हैं मगर इस ग्रुप के साथ-साथ आप अपने समझ पाएंगे और आप अपने कस्टमर और उनके बिहेवियर को भी जान पाएंगे तो अगर इन सारी चीजों का आपको समझ में आ गया है कि मार्केटिंग में हमें 6 चीजों को ना ही चलाना पड़ता है तो आपको अब तक मार्केटिंग का मार्केटिंग के बेसिक पता चल गए हैं.

मार्केटिंग के कुछ तरीके (Marketing strategy or Type of Marketing in Hindi)

दोस्तों मार्केटिंग के देख के बहुत सारे तरीके होते हैं मगर इनमें से कुछ तरीके आज डिस्कस करने वाले हैं जिन तरीकों को अपनाकर आप शॉर्ट टर्म में भी काफी अच्छा इनकम जनरेट कर पाएंगे देखिए दोस्तों तरीके का इंसान को सिर्फ एक बार दिखा सकते हैं आपको बता नहीं सकते कि आपको क्या क्या आपको मैं सिर्फ आपको यह जानने को मिलेगा कि आपके लिए मार्केटिंग के कितने तरीके जो है हो सकते हैं यानी अगर अपना भी रहे हैं तो आपके लिए कौन सा सही तरीका है तो मार्केटिंग के सही तरीके जानने के लिए आप भी पढ़ सकते हैं.

कॉज मार्केटिंग (Cause Marketing) :-

इस तरह के मार्केटिंग से मतलब है कि हम अपने किसी ग्राहक अपने ग्राहकों के लिए अपने प्रोडक्ट यह सर्विस को लेकर कुछ ऐसे कारण उत्पन्न करना जिससे वह किसी अन्य लुभावने ऑफर की जगह आपके प्रोडक्ट या सर्विस को ही चुने. इसका सबसे अच्छा उदाहरण ऑडि और मर्सिडीज जैसे कार कंपनियां है, जिनकी मार्केटिंग के लिए यह कंप्लीट मार्केटिंग के परंपरागत तरीकों को उपयोग नहीं करती, फिर भी इन का अच्छा खासा मार्केट उपलब्ध है.

एंप्लॉय मार्केटिंग :-

बहुत से बिजनेस अपने एंपलॉयर्स को अपने पोटेंशियल कस्टमर्स और ब्रांड मिस्टर मानते है. इस फैक्ट में विश्वास रखते हुए कुछ व्यक्ति अपने एंपलॉयर्स को बेनिफिट के रूप में उन्हें अपने प्रोडक्ट के लिए डिस्काउंट देते हैं. और जब एंप्लॉय इन प्रोडक्ट ओर सर्विस से संतुष्ट होते हैं, तो वे इसका प्रमोशन भी करते हैं और आपका व्यापार फैलाने में मदद करते हैं.

बिजनेस टू कंजूमर मार्केटिंग :-

इस तरह की मार्केटिंग में कंपनी सीधे अपने ग्राहक से संपर्क में रहती है और डायरेक्ट ही अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज कस्टमर को ऑफर करती हैं. कई परिस्थितियों में यह अपना व्यापार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ऑपरेट करते हैं. इसमें सभी मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस कस्टमर डाटा के अनुसार बनाई जाती है. इसमें आपको अपने ग्राहक को पूर्ण रूप से पहचानने की आवश्यकता होती है, जैसे वह कहां रहता है, उसकी चॉइस क्या है, उस का इनकम कितना है और वह आपके लिए कितने पैसे खर्च कर सकता है आदि. इस तरह की मार्केटिंग के लिए अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनी बहुत अच्छा उदाहरण है जो कि ऑनलाइन स्टोर संचालित करना अपने ग्राहकों को सीधे सेवा प्रदान करती है.

बिजनेस टू बिजनेस मार्केटिंग (B2B Marketing) :-

यह बिजनेस टू बिजनेस कस्टमर मार्केटिंग से थोड़ा भिन्न है, इसमें एक बिजनेस किसी अन्य बिजनेस को अपनी सेवाएं प्रदान करता है. और इस तरह की मार्केटिंग में बिजनेस क्यों कस्टमर मार्केटिंग के विपरीत मार्केटिंग में कई चैनल शामिल होते हैं और हाल में चैनल प्राइस, खरीदने बेचने का तरीका, पेमेंट का तरीका, स्टोरेज, आदि से संबंधित कई डिसीजन भी लेने होते.

डायरेक्ट सेलिंग :

इस तरह की मार्केटिंग में आप अपने ग्राहकों के संपर्क में सीधे आते हैं और उन्हें अपने प्रोडक्ट के फायदे, और फीचर से सीधे परिचित करवाते हैं. इस तरह की मार्केटिंग में सबसे अच्छा तरीका होता है कि आप अपने ग्राहकों का एक ग्रुप तैयार कर उन्हें अपने प्रोडक्ट की जानकारी दें और यहां अपने ग्राहकों को आकर्षित कर उन्हें अपना प्रोडक्ट सेल करें. इस तरह की मार्केटिंग में 20 चैनलों में आने वाला खर्चा भी बच जाता है और बिजनेस ओनर को अधिक फायदा होता है. Avon और एमवे जैसी कंपनी इसका बहुत अच्छा उदाहरण है जिन्होंने इस तरह से अपना एक अलग मार्केट और ग्राहक तैयार कर सफलता प्राप्त की है.

को-ब्रांडिंग और एफिनिटी मार्केटिंग :-

किसी भी व्यापार के लिए यह सत्य है कि आपके कंपीटीटर आपके ग्राहकों को बांट देते हैं, परंतु यह भी बिल्कुल सत्य है कि कई ऐसे व्यापारी भी होते हैं, जिनके साथ आप अपने ग्राहक साझा करते हैं. उदाहरण के लिए यदि कोई कंपनी किसी विषय पर ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करती है, तो उसके ग्राहक किसी स्टडी मैटेरियल बेचने वाली कंपनी के ग्राहक हो सकते हैं.

को-ब्रांड इंडिया एफिनिटी मार्केटिंग में वेदों कंपनी साथ आकर व्यापार करती है जिनके ग्राहक से हैं. क्योंकि यह एक दूसरे के प्रत्यक्ष प्रतिद्वंदी होते हैं, इसलिए यह साथ आकर अपना कंपीटीटर को बेहतर कंपटीशन देते है.

Earn मीडिया :-

मेरे ख्याल से मीडिया टीम को लेकर सभी लोग बहुत कंफ्यूज रहते हैं, मीडिया मार्केटिंग के लिए बहुत जरूरी चीज है, परंतु इसके कई तरीके हैं, जैसे: ब्रांडेड मीडिया व मीडिया होता है, जो कि कोई कंपनी अपने प्रोडक्ट के बारे में लोगों को इन्फॉर्म कर ले, एंटरटेन करने या बिजी करने के उद्देश्य से बनाती है.

पैड मीडिया किसी भी तरह का एडवर्टाइज हो सकता है, जो कि पैसे लेकर किया जाता है. यह पूर्णत: आपके बजट, मुक्त मीडिया का माध्यम है, इसका मुख्य साधन पब्लिक रिलेशन है. इसे कई बार समाचार पत्रों, मैगजीन या ब्लॉक के माध्यम से भी उपयोग किया जाता है. यहां आप इस बात से कंफ्यूज होंगे कि समाचार पत्रों या मैगजीन के माध्यम से एडवर्टाइज करने में तो पैसे लगते हैं, तो इसका जवाब यह होगा कि इन माध्यम से एडवर्टाइज के तो पैसे लगते हैं, परंतु जब इन साधनों के द्वारा आप की न्यूज़ पब्लिश करके काम की सराहना की जाती है, तो इसके पैसे नहीं लगते और आपको पब्लिसिटी भी मिलती है. इसी के साथ earn मीडिया के द्वारा किए गए प्रचार पर पब्लिक विश्वास भी अधिक करती हैं.

पॉइंट ऑफ परचेस मार्केटिंग :

इससे  हमारा तात्पर्य आपके किसी प्रोडक्ट को सेल करते समय ग्राहक को अन्य प्रोडक्ट के लिए आकर्षित करना है. उदाहरण के लिए जब आप किसी मॉल में जाते हैं, तू बिलिंग काउंटर के पास कुछ प्रोडक्ट सजाकर रखे जाते हैं, तो उस समय शेर का उद्देश्य उन प्रोडक्ट्स की तरफ ग्राहक को आकर्षित करना होता है. इसी का एक अन्य उदाहरण जब आप किसी साइट पर कोई ब्लॉक पढ़ते हैं, तो नीचे की और अन्य ब्लॉक की लिंक भी होती है, इसे साइड ऑनर का उद्देश्य रीडर को अनब्लॉक की ओर आकर्षित करना होता है. यह मार्केटिंग का बहुत ही अच्छा तरीका है.

इंटरनेट मार्केटिंग:

इंटरनेट मार्केटिंग के कई तरीके हो सकते हैं, इसी के साथ यह आज के समय में मार्केटिंग का इफेक्टिव और कम कॉस्ट वाला तरीका है. इसमें आप सोशल मीडिया, ईमेल, ब्लॉगिंग आदि में से किसी भी तरीके का उपयोग कर सकते हैं. किसी भी तरह की मार्केटिंग जो आप इंटरनेट के जरिए करते हैं वह इंटरनेट मार्केटिंग के अंतर्गत आती है. परंतु अपने व्यवसाय के प्रमोशन के लिए आपको उचित रणनीति बनानी होगी. इसी के साथ विभिन्न तरीकों और टेक्निक्स के जरिए आप अपनी इन एक्टिविटी का अनुकरण भी कर सकते हैं कि यह सही दिशा में जा रही है कि नहीं और आपके बिजनेस के लिए यह सही है या नहीं.

पैड मीडिया एडवरटाइजिंग :-

अगर आप अपने बिजनेस का प्रचार तेजी से करना चाहते हैं तो पेड़ मीडिया आपके लिए सबसे अच्छा माध्यम है. इसके लिए आपको पैसे खर्च करने होते हैं परंतु जल्दी या पैसे वसूल भी हो जाते हो. पैड मीडिया मार्केटिंग के निम्न प्रकार हैं:

  • पेड़ सोशल
  • डिस्पले एडवरटाइजिंग
  • टीवी, रेडियो या न्यूज़पेपर के द्वारा एडवर्टाइज करना
  • बिलबोर्ड्स
  • प्रिंट एड आदि

पैड मीडिया को यूज करने से पहले आपको अपने बजट और ऐडक्ट के हिसाब से इसका चयन करना होगा. कई बार बहुत बड़े लेवल पर जाने पर इसमें आपका खर्चा बहुत अधिक हो जाता है.

वर्ड ऑफ माउथ एडवरटाइजिंग :

इंटरनेट के आ जाने से यह मार्केटिंग का बहुत इफेक्टिव तरीका बन गया है. अब इस तरह की मार्केटिंग के लिए यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि आप फेस टू फेस आकर इस तरीके से मार्केटिंग करें. फेसबुक, व्हाट्सएप आदि के लिए यदि आपका कोई ब्यूटी सलून है और आपका कोई कस्टमर आपसे कोई ब्यूटी टिप्स मांगता है तो आप उसे अपने विभिन्न प्रोडक्ट सजेस्ट कर सकते हैं.

सोशल नेटवर्क और वायरल मार्केटिंग :-

आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते, किस तरह का संदेश सोशल मीडिया के द्वारा जल्दी वायरल हो जाए, मतलब जल्दी लोगों तक पहुंच जाएगा. ना आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि सोशल मीडिया पोस्ट, ब्लॉक या आर्टिकल आदि ने से क्या जल्दी लोगों तक पहुंचेगा.

परंतु आज इंटरनेट और स्मार्टफोन के युग में यह मार्केटिंग का सबसे उपयुक्त तरीका है. अगर आप इनमें से मार्केटिंग का सही तरीका चुनने में सफल होते हैं, तो आप अपने कस्टमर्स तक भी बहुत जल्द पहुंच कर उन्हें आकर्षित कर सकते हैं.

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निम्न टिप्स का उपयोग करके आप अपने कंटेंट को वायरल कर सकते हैं.

अगर आप अपने एडवर्टाइजमेंट में इमेज या वीडियो यूज़ करें तो आपके लिए लोगों का ध्यान आकर्षित करना आसान होगा यदि आप अपने फॉलोअर्स पहले बना लेते हैं और फिर अपना कंटेंट शेयर करते हैं आपका मैसेज जल्दी वायरल हो जाता है.
अगर आप अपने फ्रेंड और फॉलोअर्स हो अपना कंटेंट शेयर करने का कहते हैं तब भी आपका मैसेज जल्दी और ज्यादा लोगों तक वायरल हो जाता है.
अगर आप अन्य के मुकाबले कुछ ज्यादा एंटरटेनिंग, इंस्पायरिंग और एजुकेशन डाटा यूज़ कर मैं तो लोगों का ध्यान आप की ओर ज्यादा आकर्षित होता है.

अगर आप लोगों को आपा कंटेंट शेयर करने के लिए इंसेंटिव देते हैं तो यह भी आपके लिए अपना डाटा वायरल करने का एक अच्छा माध्यम है.

स्टोरी टेलिंग : स्टोरी टेलिंग से हमारे साथ में किसी नोबेल लिखने या फिल्म बनाने से नहीं है, यहां स्टोरी अरे मतलब अपना मैसेज इफेक्टिव तरीके से अपने दर्शक. मार्केटिंग इस तरीके से आप अपनी ऑडियंस से इमोशनली कनेक्ट होते हैं. आप चाहे तो अपने दर्शकों को अपने ब्रांड स्टोरी, अपनी सक्सेस स्टोरी या अपने किसी ग्राहक की स्टोरी शेयर कर सकते हैं.

रेफेरल प्रोग्राम : आपके पहले से बने हुए कस्टमर पर निर्भर करती है इन्हीं के द्वारा आपके लिए नए कस्टमर बनाए जाते हैं. उदाहरण के लिए यदि आप अपने एक्सिस्टिंग कस्टमर्स को नए कस्टमर्स 9:00 पर कोई ऑफर रेडिस्काउंट देते हैं तो यह आपके बिजनेस के लिए फायदे का सौदा होगा.

कॉन्टेस्ट मार्केट: एक बहुत ही असरदार तरीका है, जिसके द्वारा कस्टमर आपके तरफ आकर्षित होते हैं. आज के समय में यह तरीका फेसबुक और ट्विटर पर बहुत लोकप्रिय है, इस तरह के जरिए से बहुत बड़ी संख्या में लोग आपकी साइट पर आते हैं. कई बार अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किराना स्टोर्स और सुपरमार्केट ऑनर्स की कई तरह के कांटेक्ट चलाकर अपने ग्राहकों को आकर्षित करें.

नेटवर्किंग इवेंट्स: नेटवर्किंग से या हमारा मतलब उन लोगों तक पर्सनल रूप पहुंचाना है, जो आपकी सेवाओं से खुश हो. यह आवश्यक नहीं है कि हर समय ऑनलाइन मार्केटिंग आपके लिए कारगर है, कई बार आपको स्वयं सामने आकर अपने ग्राहकों से संपर्क साधना होता है. और इस दशा में आप अपने प्रोडक्ट को बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचा सकते हैं.

रिटारगेटिंग : मार्केटिंग के इस तरीके से आप जल्दी ही अपने कस्टमर को अपने लॉयल कस्टमर में परिवर्तित कर सकते हैं. मार्केटिंग के इस तरीके में पेड़ एडवरटाइजिंग आपके लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है क्योंकि इससे आपके ग्राहक आपके प्रोडक्ट से परिचित होते हैं. उदाहरण के लिए यदि आप किसी समूह को अपने प्रोडक्ट से परिचित करवाते हैं और फिर उसके संबंध में अपने फेसबुक अकाउंट पर जानकारी अपडेट करते हैं तो यह लोग आप की जानकारी को इसे पढ़ते हैं और आपके प्रोडक्ट की ओर आकर्षित होते हैं.

सोशल मीडिया मार्केटिंग : दोस्तों सोशल मीडिया आपका बहुत ही कम खर्चे में बहुत सारे लोगों तक आपके प्रोडक्ट को पहुंचाने की क्षमता रखता है या नहीं अगर आप मार्केटिंग करनी ही है तो आपको सोशल मीडिया मार्केटिंग करनी बहुत ज्यादा जरूरी है आप दो तरह से कटिंग कर सकते हैं एक तो आप फ्री में लोगों को भेज सकते हैं अपने प्रोडक्ट की जानकारी नहीं तो आप इसमें ऐड भी चला सकते हैं और इन तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ऐड चलाने पर ज्यादा पैसे नहीं लगते हैं बाकी के मुकाबले और आपके ज्यादा लोगों तक पहुंच भी जाते हैं यानी आपको ज्यादा से ज्यादा लोग पहचान जाते हैं आपके प्रोडक्ट को जान जाते हैं आजकल हर कोई सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और जरूरत की स्थिति में इसे यूज भी करता है. आप चाहे तो अपने इस अकाउंट के सहायता से व्यापार का प्रमोशन भी कर सकते हैं. और उपयुक्त जानकारी अपने फॉलोअर्स तक पहुंचा भी सकते हैं.

इनबॉउंड मार्केटिंग : मार्केटिंग में तो आपका बिल्कुल भी पैसा खर्च नहीं होगा इस तरह की मार्केटिंग में आपको आपका लॉयल कस्टमर जिंदगी भर के लिए मिलेगा यानी जब तक आपकी कंपनी सस्पेंड कर रही है मार्केट मैं नाम है तब तक आपका कस्टमर आपको छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला मार्केटिंग को कैसे करते हैं यह मार्केटिंग होती है जहां आप अपने कस्टमर एशियन को अपने कंपनी के कार्यों में उनको इन्वॉल्व करते हैं यानी जैसे कि कभी आपने देखा होगा कुछ कंपनी है तो वह आपको अगर आपने कोई अच्छा प्लान किया है तो आपको कुछ विशेष भी देते हैं जिसके साथ कुछ भी आपको मिल गए हैं जिसमें आपको कई कूपन कोड मिलते हैं मार्केटिंग से यह लोग आपको जो है पर मैंने कस्टमर बनाने की प्लानिंग करते हैं और यही मार्केटिंग आपकी बहुत ज्यादा असरदार भी रहती है क्योंकि इससे व्यक्ति को भी लेकर आता है अगर उसे अच्छा लगता है तो वह दूसरे व्यक्ति को भी फ्री में आपकी प्रमोटिंग करता है कि नहीं देखें यह प्रोडक्ट बहुत अच्छा है हम यूज करते इस तरह के वचन बोलने के लिए ये पैसे भी नहीं मिलते तो इस तरह से कस्टमर आपके साथ रॉयल हो जाता है मैं एक नहीं दस कस्टम लेकर आता है तो यह मार्केटिंग आपकी बहुत ज्यादा जरूरी है इसके लिए सिर्फ और सिर्फ आपको अपने कस्टमर से रिलेशन बनाना है उनकी परेशानी को सर्च करना है और टाइम टू टाइम उनके साथ टच में रहना है. इनबॉउंड मार्केटिंग में वह सभी एक्टिविटी शामिल होती है जो लोगों को आपके व्यापार के प्रति आकर्षित करते हैं. इस प्रकार की मार्केटिंग में आप किसी टेलीविजन पर ऐड देने की अपेक्षा लोगों से पर्सनली मिलते है या उनसे सोशल मीडिया पर संपर्क साधते हैं और उन्हें आकर्षित करते हैं.

आउटबाउंड मार्केटिंग : आउटबाउंड मार्केटिंग मार्केटिंग का सबसे पुराना और सदियों से यूज़ हो रहा तरीका है. हालांकि सदियों पुराने तरीकों में थोड़ा बदलाव जरूर आ चुका है, जोक समय के साथ जरूरी भी है. इनबॉउंड मार्केटिंग के कई लाभ होने के बावजूद भी लोग बड़े सक्सेस के लिए मार्केटिंग के इस तरीके को उपयोग में लाते हैं. साथ ही यह एक ऐसा अधिक लोगों को टारगेट भी करते हैं.

सेगमेंटेशन : इसका मतलब होता है कि बटवारा एक तरीके का आपके पास एक प्रमोशन के लिए टारगेट चीजें है यानी आपको पता है क्या आपका सेगमेंट क्या है, और यह मार्केटिंग में सही है और टारगेटेड प्रमोशन के लिए आवश्यक भी है. उदाहरण के लिए यदि आप ऑनलाइन कोई फिटनेस कोर्स चला रहे हैं तो आपके सामने एक नई तरह के कस्टमर होंगे जैसे वेट लॉस करना है, जिन्हें वेट गेन करना है, जो बॉडीबिल्डिंग करना चाहते हैं या जो स्ट्रेंथ गेन करना चाहते हैं आदि होते हैं. सभी के लिए अलग तरह के प्रमोशन की जरूरत होगी. इसलिए आपको अपने कस्टमर का सेगमेंटेशन करना आवश्यक है.

ईमेल कैंपेनिंग : दोस्तों इस बदलते युग में आप देख पा रहे हैं कि पहले के वक्त में लोग तार पत्रों का इस्तेमाल किया करते थे लेकिन अब ईमेल का इस्तेमाल करते हैं और ईमेल मार्केटिंग काफी ज्यादा असरदार होती है यानी आप अपने कस्टमर को डायरेक्ट भेज सकते हैं अपने नए प्रोडक्ट की जानकारियां दे सकते हैं और कई सारे भी आज भी करते हैं आपने कभी देखा होगा कि आप किसी भी कंपनी का प्रोडक्ट लेते हैं जैसे आपने अमेज़न या कोई प्रोडक्ट लिया उसके बाद एक महीने बाद प्रोडक्ट के बारे में डिटेल कोई नया प्रोडक्ट होता है उसके बारे में डिटेल सब चीजों की डिटेल आपको ईमेल के जरिए मिलते रहते हैं यानी आप उनकी एक कस्टमर बन चुके हैं और आपको नए प्रोडक्ट की जानकारी उनके द्वारा मिलते रहते हैं तो जिसे हम ईमेल मार्केटिंग भी कहते हैं उन्हें अपने प्रोडक्ट की जानकारी या कोई अन्य इंफॉर्मेशन डायरेक्ट प्रदान कर सकते हैं. इसके अलावा आप अपनी डिस्काउंट, न्यू कलेक्शन, से, ओपन आदि से संबंधित जानकारी में डायरेक्ट कस्टमर को सेंड कर सकते हैं. आजकल कई बड़ी कंपनी जैसे पैंटालून, मेट्रो. स्पाईकर. आदि भी मार्केटिंग का यह तरीका बखूबी यूज करते हैं और अपने कस्टमर्स को अपने स्टाफ और पॉलिसी से अवेयर रखती है.

ब्रांडिंग : यहां ब्रांडिंग से तात्पर्य कस्टमर के दिमाग में अपनी इमेज सेट करना है. इसमें कंपनी को लोगो, टैगलाइन, सूअर, संरचना आदि शामिल होता है. ब्रांडेड का सबसे सही तरीका अपने कस्टमर्स के सामने यह फिगर आउट करना है कि आप मार्केट में फर्स्ट पोजीशन पर क्यों है. आज के समय में ब्रांडी का सबसे अच्छा उदाहरण ठंडा मतलब कोका कोला, रेमंड अ कंपलीट मैन, गोदरेज अलमारी आदि है.

एजाइल मार्केटिंग (Agile Marketing) : मार्केटिंग के इस तरीके से तात्पर्य विभिन्न प्रयासों के माध्यम से कस्टमर के मन में अपने ब्रांड के प्रति एक विश्वास उत्पन्न करने से हैं. इसके लिए आप कस्टमर सर्वे, कस्टमर डाटा एनालिसिस आदि तरीके उपयोग कर सकते हैं.

एफिलिएट मार्केटिंग : अगर आप जल्द ही बहुत सारे कस्टमर को टारगेट करना चाहते हैं तो आपको मार्केटिंग के इस तरीके को यूज कर सकते हैं. इसके अंतर्गत आप अपनी कंपनी की मार्केटिंग के लिए किसी अन्य कंपनी से एफिलिएट होते हैं और आपके लिए उनके द्वारा बना कस्टमर्स के लिए उन्हें कमीशन प्रदान करते हैं.

ऑगमेंटेड रियलिटी मार्केटिंग : यह बहुत ही बड़े टाइप की मार्केटिंग है या नहीं एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी भी आप कह सकते हैं साथ ही यह अन्य मार्केटिंग के तरीकों से ज्यादा महंगा चुनाव है यानी आपका इस तरह की मार्केटिंग के लिए काफी पैसा जाने वाला है. आजकल हर सेवा दाता मार्केट में विभिन्न तरीकों से ग्राहकों तक पहुंचने का विकल्प खोज रहा है ताकि वह उन्हें अपने प्रति आकर्षित कर सर. उदाहरण के लिए अभी हाल ही में आने से रक्त में खराबी की खबर के चलते आशीर्वाद आटा और मैजिक जैसी नामी कंपनी सोशल मीडिया और टेलीविजन के जरिए सामने आकर इस तरीके से मार्केटिंग के विकल्प को चुना था.

Conclusion 

व्यापार को बढ़ाने के लिए आपको अपनी मार्केटिंग चीजों पर ध्यान देना होगा और मार्केटिंग को जानने के लिए आपको पहले मार्केटिंग को समझना होगा इस पूरे पोस्ट में हमने आपको बहुत ही ज्यादा डिटेल में मार्केटिंग को समझाया है मार्केटिंग क्या है मार्केटिंग कैसे करते हैं मार्केटिंग के कितने प्रकार है मार्केटिंग हम कैसे करें मार्केटिंग अपने बिजनेस के लिए अपने प्रोडक्ट के लिए कैसे करें किस तरह की मार्केटिंग से आपका प्रोडक्ट जो है लोगों तक पहुंचेगा किस तरह की चीजें अपना कराओ अपने बिजनेस को बढ़ा सकेंगे इसके लिए मार्केटिंग क्यों जरूरी है कि सारे सवालों के जवाब आपको मिल गए.

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